मंगलवार, 14 जुलाई 2009

भारतवासी


हम भारत के भारतवासी जग में हम नाम कमायेंगे।

जिस मिट्टी में है जन्म लिया, उसका ये कर्ज़ चुकायेंगे।

हम भारत के...

मज़हब के लिये लडते रहना,ये सब से बडी नादानी है।

वसुधैव कुटुंब कि भावना का,घर घर में दीप जलायेंगे।

हम भारत के...

आज़ादी को पाने के लिये जो शहीद हुए थे वेदी प्र।

हम भी उस नक्शे कदम चलकर वीरों में नाम कमायेंगे।

हम भारत के..

इस मिट्टी से सीखा हमने हर मज़हब को है अपनाना।

गंगा-जमनी तहेज़ीब से हम, सारा भारत चमकायेंगे।

हम भारत के...

जब भी है मुसीबत आन पडी, भारत ने हार नहिं मानी।

हम एक थे, एक है , एक रहकर, एकता का सबक सिख़ाएंगे।

हम भारत के....

22 टिप्‍पणियां:

kavi kulwant ने कहा…

bahut khoob ji

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... सुन्दर रचना, प्रसंशनीय !!!

नीरज कुमार ने कहा…

achchhi bavana hai aur sachcha desh-prem...

~PakKaramu~ ने कहा…

Pak Karamu reading your blog

amlendu asthana ने कहा…

Karwa-A- Aman ko mera Naman. Apko swatantrata ki badhai de raha hoon. meri taraf se Apke shahar ke nanhen pankhon ko dher sara pyar.
Blog achchha laga.

amlendu asthana ने कहा…

Bahut der se Apki ye 23 septwali kavita padi. Mafi chahta hoon. Bahut umda khayal hai. Kash yaisa sab sochte. maine us post per bhi apna abhar vaiqt kiya hai.

राहुल सि‍द्धार्थ ने कहा…

अपनी भावना को शब्दों में पिरोना ही अच्छी कविता है.अच्छा लिखा आपने साथ ही हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद!!

vikram7 ने कहा…

मज़हब के लिये लडते रहना,ये सब से बडी नादानी है।
बहुत सही,सुन्दर रचना

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

बहुत ही प्रेरक रचना है। बधाई।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

अर्शिया ने कहा…

इस प्रेरक रचना के लिए आभार।
( Treasurer-S. T. )

Suman ने कहा…

जब भी है मुसीबत आन पडी, भारत ने हार नहिं मानी।

हम एक थे, एक है , एक रहकर, एकता का सबक सिख़ाएंगेnice

BAD FAITH ने कहा…

मज़हब के लिये लडते रहना,ये सब से बडी नादानी है। . सुन्दर विचार

शहरोज़ ने कहा…

तसलीम आपा! दिनों बाद आया खूब लगा. मेरी नयी पोस्ट पढ़िए

ज्योति सिंह ने कहा…

deshbhakti geet jise padhkar desh ke prati aastha jaagrit ho jaaye ,bahut umda

Prerna ने कहा…

bharat ma ki jai..achi rachna

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत सुन्दर. देश-प्रेम से लबरेज़.

आशीष/ ASHISH ने कहा…

Jai Hind!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

सुन्दर ख्याल है ! हर कोई ऐसा सोचे तो नफरत मिट जाये !

zeashan zaidi ने कहा…

उसने कहा की दीन की तारीख पूरी लिख,
मैंने फ़क़त 'हुसैन' लिखा और कुछ नहीं!
विलादत-ए-बा-सआदत हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) बहुत बहुत मुबारक!

Rayaz Baghakoli ने कहा…

Desh bhakti kut kut kar bhari hai is kavita mein....likhte rahiye...

amrendra "amar" ने कहा…

बहुत ही प्रेरक प्रसंशनीय सुन्दर रचना , बधाई।

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…


मज़हब के लिये लडते रहना
ये सब से बडी नादानी है
वसुधैव कुटुंब की भावना का
घर घर में दीप जलायेंगे

हम भारत के भारतवासी
जग में हम नाम कमायेंगे…

आपकी इस प्रविष्टि की जितनी प्रशंसा की जाए , कम है …

सुंदर शब्दों से सजे सुंदर भाव !
बहुत सुंदर …
बधाई !

…आपकी लेखनी से सुंदर रचनाओं का सृजन ऐसे ही होता रहे , यही कामना है …


आदरणीया रज़िया "राज़" जी
नमस्कार !

आशा है सपरिवार स्वस्थ सानंद हैं
नई पोस्ट बदले हुए बहुत समय हो गया है …
आपकी प्रतीक्षा है सारे हिंदी ब्लॉगजगत को …
:)

शुभकामनाओं सहित…
राजेन्द्र स्वर्णकार